इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM)क्या है, और काम कैसे करती है?

EVM क्या है? What's EVM in Hindi

आप ने ईवीएम मशीन के बारे में जरूर सुना होगा और अगर आप 18 वर्ष के हैं तो आपने वोट डालने के लिए इसका इस्तेमाल भी किया होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं की ईवीएम मशीन क्या है और यह काम कैसे करती है? अगर आप नहीं जानते हैं तो इस आर्टिकल में आपको Electronic mechanical device की पूरी जानकारी मिल जाएगी। हम यहां पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बारे में ही बता रहे हैं। what’s EVM and the way it add Hindi.

EVM Machine की Security को लेकर कई Political Parties ने सवाल खड़े किए हैं। जिसकी वजह से रोज अखबार में ईवीएम के बारे में कोई ना कोई News आती रहती है।
इस वजह से हर कोई ईवीएम मशीन के बारे में जानना चाहता है। इस आर्टिकल में हम मतदान वोटिंग मशीन और उससे जुड़ी चीजों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
ताकि आप सभी भी EVM के बारे में जान सको। Election Commission ने 2019 Election में नए और Advanced EVMs का इस्तेमाल किया है। हम EVM के सभी विषयों पर बात करेंगे।
तो चलिए जानते हैं इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन क्या होता है और यह काम कैसे करता है?

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EVM क्या है? What is EVM in Hindi?

EVM की Full Form है Electronic Voting Machine, यह एक ऐसी मशीन है किसका इस्तेमाल भारत में मतदान (अपने उम्मीदवार को चुनने) के लिए किया जाता है।
भारत में इस मशीन का उपयोग आम चुनावों, राज्य विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग का मार्ग प्रशस्त करने के लिए 1999 से किया जा रहा है।
पहले चुनाव Ballot Paper से हुआ करते थे, लेकिन अब पूरे भारत में बैलेट पेपर की जगह ईवीएम मशीन ने ले ली है।
EVM में 2 Units होते हैं, एक Control Unit और दूसरा Balloting Unit होता है।
यह दोनों Units एक दूसरे के साथ five-meter cable से जुड़ी हुई रहती है। Control unit ballot units को control करती है और Ballot units मतदाता को मतदान की सुविधा प्रदान करती है।
कंट्रोल यूनिट का इस्तेमाल मतदान अधिकारी करता है जबकि बैलटिंग यूनिट का इस्तेमाल मतदाता (Voter) करता है। जब तक मतदान अधिकारी कंट्रोल यूनिट का बटन press नहीं करेगा, तब तक वोटर वोट नहीं डाल सकता।
Ballot unit से vote डालने के बाद, मशीन अपने आप लोग हो जाती हैं। उसके बाद कोई बटन को कितना भी तबाह वह काम नहीं करती। वो मतदान अधिकारी के कंट्रोल यूनिट बटन दबाने के बाद ही फिर से काम करेगी।

ईवीएम मशीन कैसे काम करती है?

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन प्रत्येक उम्मीदवार के लिए एक अलग बटन प्रदान करती है। मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार और पार्टी के बटन पर क्लिक करके वोट दे सकता है।

EVM निम्न प्रकार से काम करता है।

  • सबसे पहले मतदाता अपने उम्मीदवार के Button को दबाता है।
  • मतदाता के बटन दबाते ही Peeeee की आवाज आती है, जिसका मतलब वोट डल गया है।
  • इसके बाद VVPAT screen पर बुधवार का नाम और पार्टी का चुनाव चिन्ह प्रिंट होता है।
  • यह पर्ची 7 सेकंड तक मतदाता को VVPAT स्क्रीन पर दिखती है, उसके बाद मशीन में सुरक्षित जमा हो जाती है।

पहले इसमें सिर्फ EVM की दो इकाइयां Control unit और Balloting Unit इस्तेमाल होता था लेकिन EVM Security पर सवाल उठाए जाने के बाद से चुनाव आयोग VVPAT का भी इस्तेमाल करने लगा है।

VVPAT का मतलब होता है Voter-verified paper unit trail जो यह दर्शाता है कि आपका वोट किस उम्मीदवार को गया है। ये 7 सेकंड तक screen पर पर्ची को दिखाता है, जिससे मतदाता को clear हो जाता है कि उसका वोट किसको गया है।

मतदाता के वोट डालने के बाद, वीवीपैट मशीन पर उस उम्मीदवार का नाम और उसकी पार्टी का चुनाव चिन्ह पर्ची पर प्रिंट होता है। यह पर्ची 7 सेकंड तक मतदाता को वीवीपैट screen पर दिखती है। उसके बाद मशीन में सुरक्षित जमा हो जाती है।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल कैसे करें?

EVM से वोट कैसे डालते है?

EVM से वोट डालना बहुत आसान है। मशीन में बाएं तरफ सभी उम्मीदवारों का नाम और उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह छपा हुआ होता है।

Balloting Unit में हर उम्मीदवार के नाम के आगे लाल लाइट और एक नीला बटन होता है। वोट डालने के लिए आप निम्न स्टेप फॉलो करें।

  1. सबसे पहले EVM मशीन में अपने पसंदीदा उम्मीदवार का नाम देखें।
  2. उसके बाद उसके नाम के आगे मौजूद नीला बटन दबाएं।
  3. आप के बटन दबाते ही रेड लाइट जल जाएगी और लंबी Peeeee जैसी आवाज आएगी।
  4. इसका मतलब आपका वोट आपके पसंदीदा उम्मीदवार को चला गया है।

आपके वोट डालते ही मशीन लोक हो जाती है। अब अगर दोबारा कोई ईवीएम मशीन का बटन दबाता है तो मशीन उसे रिकॉर्ड नहीं करेगी।

EVM मशीन में कितने Units होते हैं?

ईवीएम की संरचना और तकनीक: जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूं EVM मशीन में दो यूनिट होते हैं। एक कंट्रोल यूनिट और दूसरा बैलटिंग यूनिट।

कंट्रोल यूनिट मतदाता ऑफिसर के लिए और बैलटिंग यूनिट मतदाता के लिए मतदान करने के लिए होता है। लेकिन अब भारतीय चुनाव आयोग Election में VVPAT मशीन का भी इस्तेमालकरने लगा है।

जिसका काम मतदाता को यह दिखाना है कि उसने जिस उम्मीदवार को वोट डाला है, उसका वोट उसको गया है या नहीं। इससे मतदाता को साफ हो जाता है कि उसका वोट सही जी के गया है या नहीं।

आप बैलट यूनिट के बटन को एक बार ही दबा सकते हैं। उसके बाद वह मशीन तब तक काम नहीं करेगी जब तक मतदाता ऑफिसर कंट्रोल यूनिट का बटन नहीं दबा आएगा।

इसका मतलब एक वोटर सिर्फ एक ही वोट डाल सकता है। EVM की सिक्योरिटी को लेकर जितने भी सवाल उठाए गए हैं आज तक उनमें से एक भी सही साबित नहीं हुआ है।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के फायदे

ईवीएम मशीन के एक नहीं बल्कि बहुत सारे फायदे हैं, जो निम्न प्रकार है।

  • EVM का प्रारंभिक खर्च थोड़ा ज्यादा है लेकिन long term की सोचें तो पैसों की बचत होती है।
  • बैलट पेपर के उत्पादन और छपाई में होने वाले करोड़ों रुपए के खर्च को कम किया जा सकता है।
  • प्रत्येक राष्ट्रीय चुनाव के लिए, लगभग 10,000 टन बैलट पेपर की बचत होती है।
  • इसके इस्तेमाल से बहुत से पेड़ों को काटने से रोका जा सकता है जिनका इस्तेमाल Ballot Paper बनाने के लिए होता था।
  • ईवीएम मतपेटियों की तुलना में परिवहन के लिए आसान होते हैं। क्योंकि वे अधिक हल्के और Portable होते हैं।
  • EVM में बैटरी का इस्तेमाल होता है इसलिए इसका इस्तेमाल कहीं पर भी किया जा सकता है।
  • EVM Votes Counting बहुत आसान और तेज होती है।
  • अनपढ़ लोगों के लिए EVM बैलेट पेपर से कहीं ज्यादा बेहतर है।
  • इसमें व्हाट हेल्प हेर और चोरी होने की संभावना बहुत कम होती है।
  • बोगस वोटिंग बहुत कम होती है क्योंकि वोट सिर्फ एक बार ही डाला जा सकता है।

क्या EVM मशीन में Delete का ऑप्शन होता है?

बिल्कुल नहीं, मतदाता के वोट डालने के बाद मशीन लॉक हो जाती है। उसके बाद, आप अपने वोट को फिर से Editडिलीट या बदल नहीं सकते हैं। आपको दूसरा मौका नहीं मिलेगा।

पहले बैलट पेपर में अपनी ताकत का इस्तेमाल कर दादागिरी से बैलट पेपरों पर अपनी पार्टी के बटन पर मोहर लगाकर दबंग जीत जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होता।

EVM पूरी तरह से सुरक्षित है और आप उसमें कोई भी बदलाव नहीं कर सकते। एक व्यक्ति सिर्फ एक बार ही वोट डाल सकता है। एक बार बटन दबाने के बाद हजार बार बटन दबाने पर भी कुछ नहीं होगा।

EVM मशीन का इस्तेमाल सबसे पहले कब और कहाँ हुआ था?

ईवीएम मशीन का इस्तेमाल सबसे पहले 1998 में हुआ था। तब राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली के विधानसभा चुनाव ईवीएम मशीन के द्वारा ही करवाए गए थे।

पहले ही चरण में प्रयोग सफल रहने के बाद, लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में भी ईवीएम मशीन का इस्तेमाल किया जाने लगा।

तब से अब तक भारतीय चुनाव आयोग हर चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल करते हैं। अभी भी कुछ पुरानी मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है लेकिन VVPAT को सिर्फ नई मशीनों से ही जोड़ा जा सकता है।

EVM मशीन में अधिकतम कितने प्रत्याशियों के नाम हो सकते हैं?

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में total 16 buttons होते हैं। यानी कि एक unit में सिर्फ 16 प्रत्याशियों के नाम जोड़े जा सकते हैं। उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने पर Election Commission ईवीएम के साथ एक और Balloting unit को जोड़ देता है।

अब तक अधिकतम 4 बैटिंग यूनिट को एक साथ जोड़कर चुनाव कराया जा चुका है। इसका मतलब अधिकतम 64 प्रत्याशी चुनाव में भाग ले सकते हैं।

एक ईवीएम मशीन में अधिकतम 3840 ही वोट रिकॉर्ड हो सकते हैं। इसलिए वोटर लिस्ट ईवीएम की क्षमता के आधार पर तैयार की जाती है और एक ईवीएम में 1000 से 1500 ही लिए जाते हैं।

भारत द्वारा निर्मित ईवीएम मशीन का निर्यात किन किन देशों में किया जाता है?

वोटिंग मशीन का इस्तेमाल भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी किया जाता है। भारत एक नहीं बल्कि कई सारे देशों में ईवीएम मशीनों का निर्यात करता है।

इसमें नेपाल, भूटान, केन्या, फिजी और नामीबिया जैसे कई देश शामिल है। नामीबिया द्वारा 2014 में संपन्न राष्ट्रपति चुनाव के लिए भारत से निर्मित 1700 Control Units और 3500 Balloting Units का आयात किया गया था।

इन सब के अलावा कई और एशियाई और अफ्रीकी देश भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।

निष्कर्ष,

इस पोस्ट में हमने ईवीएम क्या है, ईवीएम काम कैसे करता है, ईवीएम मशीन के फायदे, ईवीएम में कितने यूनिट होते हैं और वीवीपैट के बारे में जाना।

उम्मीद है आपको हमारी “इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन” वाली यह पोस्ट पसंद आई होगी आपको इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीन (EVM) की पूरी जानकारी मिल गई होगी।

 

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